कोरोना वायरस के कहर को रोकने के दुनिया कोशिश कर रही है। वहीं भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 दिनों तक देश को लॉकडाउन कर दिया है। इसके पुलिस व प्रशासन सख्ती बरत रहे हैं। लॉकडाउन का एेलान होते ही लोगों ने राशन, सब्जी, दवाइयों की दुकान में भीड़ लगाना शुरू कर दिया। सख्त प्रशासन होने के बावजूद भी देश के अलग-अलग हिस्सों से राशन की दुकानों और स्टोर्स के साथ ही सब्जी व फलों की दुकानों पर भीड़ की तस्वीरें देखने को मिल रही है। इन्हीं स्टोर्स और दुकानों से कोरोना वायरस के फैलने का सबसे ज्यादा खतरा है क्योंकि यहां लोगों की भीड़ सबसे ज्यादा होती है। अगर आपका बाहर निकलकर जरूरी सामान ले रहे है तो थोड़ी सावधानी जरूरी बरतें।
न लगाएं भीड़
लॉकडाउन के बाद सड़कों, दफ्तरों, खेल के मैदानों, पार्कों और सभी सार्वजनिक स्थानों पर सन्नाटा पसरा हुआ है। ऐसे में सिर्फ खाने-पीने के सामान की दुकानों और मेडिकल स्टोर्स पर ही लोगों की भीड़ एकजुट होते दिख रही है। ऐसे में आपको इन जगहों पर जाते समय भी सोशल डिस्टेंसिंग (Social Distancing) और सुरक्षा उपायों का खास ख्याल रखना है।
जरूर लगाएं मास्क
ऐसी जगहों पर जाते समय मास्क जरूर पहनें क्योंकि अगर कोई संक्रमित व्यक्ति स्टोर या दुकान पर खड़े होकर खांसता या छींकता है तो वो ड्रॉपलेट के साथ हवा में वायरस भी छोड़ेगा। शोध में पता चला है कि कोरोना वायरस हवा में करीब 3 घंटे तक जिंदा रह सकता है। अब अगर उस जगह आप सांस लेते हैं तो हवा के साथ वायरस को भी इनहेल कर लेंगे।
ग्रॉसरी स्टोर्स में काम करने वाले कई कर्मचारी संक्रमित
अमेरिका में कोरोना वायरस फैलने के साथ ग्रॉसरी स्टोर्स (Grocery Stores) पर काम करने वाले कई कर्मचारी भी संक्रमित हो गए। सियाटल के एक स्टोर में काम करने वाले जो भी कोरोना टेस्ट में पॉजिटिव पाए गए। कुछ ऐसा ही डेनवर में भी हुआ। यहां तीन कर्मचारी बीमार पड़ गए। वाशिंगटन में भी एक स्टोर कर्मी का कोरोना टेस्ट पॉजिटिव पाया गया है। अमेरिका में अब तक सिर्फ 6 स्टोर कर्मी ही संक्रमित हुए हैं।
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नीति आयोग ने कोरोनावायरस महामारी से निपटने के लिए एक 100 दिन की योजना तैयार करना शुरू किया है. नीति आयोग के प्रमुख अमिताभ कांत और मेंबर (स्वास्थ्य) वीके पॉल के नेतृत्व में एक विस्तृत योजना बनाई जा रही है जिसमें अगले तीन महीने में आने वाली आपातकालीन ज़रूरतों का आकलन किया जा रहा है. अगर कोरोनावायरस और भयानक रूप लेता है तो ये योजना काम में आयेगी.
इस योजना के तहत नीति आयोग केंद्र सरकार से उसके सामान की ज़रूरत के आंकलन को साझा करेगी.
दिप्रिंट को पॉल ने बताया, ‘इस योजना का मकसद फौरी और मध्य समयावधि में जरूरतों के लिए स्वयं को तैयार करना है- ये डाटा जो बता रहा है और जो साक्ष्य उपलब्ध है उसके आधार पर तय किया गया है.’
पॉल का कहना था कि राज्य सरकारें और केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय मिलकर गहन कोशिश कर रहे हैं कि व्यवस्थित आंकलन और योजनाबद्ध तरीके से जरूरतों को पूरा करने की तैयारी कर पाये. इसके लिए देश में और दुनिया भर में उपलब्ध डाटा की जांच कर बीमारी की संभावित अवस्था को ध्यान में रख कर योजना तैयार की जायेगी. एक थिंक टैंक होने के नाते हमारे तेजी से बदलते घटनाक्रम में समय पर उपाय देना राष्ट्र की कोशिशों में मददगार होगा.
उनका साथ ही कहना था कि भारत में अभी इस बिमारी का कम्युनिटी ट्रांसमिशन शुरु नहीं हुआ है.
बुधवार तक स्वास्थ्य मंत्रालय के डाटा के अनुसार भारत में 606 कोरोनावायरस के केस सामने आये थे. एक्टिव कोविड-19 केसों की संख्या 553 थी जबकि 43 लोगों का इलाज हो गया था और वे ठीक होकर डिस्चार्ज हो गए थे.
नीति आयोग परखेगा कि उपलब्ध संसाधन कितने हैं और आने वाले समय में देश भर में कितने और माल की जरूरत होगी. उन क्षेत्रों के लिए विशेष प्रावधान होगा जहां संसाधन कम है.
माना जा रहा है कि नीति आयोग ये योजना अगले हफ्ते तक स्वास्थ्य मंत्रालय को सौंपेगा.
एक सरकारी अधिकारी के अनुसार, ‘मानव संसाधन, निजि सुरक्षात्मक सामान, वेंटीलेटर, सरवेलेंस के लिए संसाधन, एंबुलेंस मुहैया कराने जैसा विस्तृत आंकलन किया जायेगा.’
इस अनेलिसिस से वित्तीय जरूरतों का आंकलन भी किया जायेगा ताकि आने वाले तीन महीनों के लिए कोविड-19 से निपटने के लिए तैयार रहे- चाहे बिमारी, हलके, कम गंभीर या अत्यधिक संक्रमण का रूप धारण कर ले.
एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि, ‘पहले से ही शोध करने से भारत को इस महामारी से निपटने के लिए एक रणनीति तैयार करने में मदद मिलेगी. इस बीमारी ने विकसित देशों की अच्छी स्वास्थ्य सेवाओं को भी ध्वस्त कर दिया है.’
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